CHAPTER -1 ठोस अवस्था (SOLID STATE )
बन्धन बलों की प्रकृति के अनुसार ठोस चार प्रकार के होते हैं।
👉 1. आण्विक ठोस (MOLECULAR SOLID ) -: सरल अलग अलग अणुओ से बने होते हैं। आणविक ठोसों में अणु एक दूसरे से क्षीण वन्डरवाल बल से बंधे होते है. इसी कारण इनका गलनांक और क्वथनांक कम होता है।
EX . आयोडीन ,सल्फर ,शुष्क बर्फ (ठोस CO २ )
👉 २. आयनिक ठोस (IONIC SOLID):- इन ठोसों के क्रिस्टल जालक धनायनों और ऋणायनों से बने होते है। आयनिक क्रिस्टल संरचना के कारण आयनिक ठोसों के गलनांक और क्वथनांक ऊँचे होते है।
EX. . सोडियम क्लोराइड(NaCl ) , धातु के ऑक्साइड ,धातु के सल्फाइड
👉 3 . सहसंजोयक ठोस (COVALENT SOILD):-इन ठोस पदार्थो के क्रिस्टल जालक परमाणुओं से बने होते हैऔर परस्पर प्रबल सहसयोजक बंधो द्वारा जुड़े होते है।
सहसयोजक ठोस परमाण्विक ठोस (ATOMIC SOLID )भी कहलाते है।
EX. डायमंड ,ग्रेफाइट बोरोन नाइट्राइड ,सिलिका ,सिलिकॉन कार्बाइड
4. धात्विक ठोस (METALLIC SOLID) :- जो ठोस धातुओ का गुण प्रदर्शित करते है धात्विक ठोस कहलाते है।
इन् ठोसों में परमाणु धात्विक आबंध से जुड़े होते है।
EX . Na ,K,Fe ,Cu etc
ठोस में उसके घटक कणो (परमाणु ,आयन या अणु ) की व्यवस्था के आधार पर ठोस के प्रकार
1. क्रिस्टलीय ठोस (CRYSTALLINE SOLID)
2 . अक्रिस्टलीय (AMORPHOUS SOLID )
1 . क्रिस्टलीय ठोस :- क्रिस्टलीय ठोस में घटक कणो की दीर्घ परिसर वयवस्था (long range order होती है। क्रिस्टल के पृष्ठ एकसमान और समतल होते है
क्रिस्टल का एक निश्चित एव स्पष्ट (sharp ) गलनांक होता है।
ex . कॉपर ,सिल्वर सोडियम क्लोराइड अदि
2 अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous ) :- इन ठोसों में क्रमित (ordered )क्रिस्टलीय अवस्था नहीं होती हैं। अक्रिस्टलीय ठोस वास्तव में अतिशीतित द्रव है।
अक्रिस्टलीय ठोस में घटक कणो की लघु परिसर व्यवस्था (short range ordered )होती है। इनकी कोई ज्यामितीय आकृति shape नहीं होती है। इनका कोई निश्चित व स्पस्ट गलनांक नहीं होता है।
ex . कांच ,रबर, मोम , बटर, प्लास्टिक etc
क्रिस्टल संरचना (crystal structure ):- किसी क्रिस्टलीय ठोस में उसके कणो की त्रिविम व्यवस्था उसकी क्रिस्टल संरचना कहलाती है।
क्रिस्टल जालक (CRYSTAL LATTICE ):- किसी क्रिस्टल में परमाणुओं का व्वस्थित वयवस्था उसका क्रिस्टल जालक कहलाता है
जालक बिंदुएं (LATTICE POINT ):- क्रिस्टल जालक में विंदुये जालक बिंदु कहलाती है।
एकक कोष्ठिका या एकक सेल (UNIT CELL ):- किसी क्रिस्टल जालक का लघुतम पुनरावर्ती यूनिट उसकी एकक कोष्ठिका या एकक सेल कहलाती है।
घन क्रिस्टल निकाय (CUBIC CRYSTAL SYSTEM ):- सात क्रिस्टल निकायों में घन क्रिस्टल निकाय मुख्य है।
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घन क्रिस्टल निकाय तीन प्रकार के होते है।
1. सरल घन एकक सेल (SIMPLE CUBIC UNIT CELL OR PRIMITIVE CUBIC UNIT CELL ):-
2 . काय केंद्रित घन एकक सेल (BODY CENTERED CUBIC UNIT CELL -BCC )
3 . फलक -केंद्रित घन एकक सेल (FACE -CENTERED CUBIC UNIT CELL -FCC )
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1. सरल घन एकक सेल :- इसमें जालक बिंदुएं (lattice point ) केवल कोनो पर होती है।
ex . ठोस ऑक्सीजन और पॉलोनियम
2. काय केंद्रतित घन एकक सेल :- इसमें एकक सेल की जालक बिंदुएं कोनो पर और एक जालक बिंदु एकक सेल के केंद्र पर होती है।
ex .. आयरन ,क्रोमियम और टंगस्टन
3. फलक केंद्रित घन एकक सेल :- इसमें एकक सेल की जालक बिंदुये 8 कोनो पर और एक जालक बिंदु 6 फलकों के केंद्र पर होती हैं।
ex .. निकिल ,कॉपर ,सिल्वर गोल्ड और alunimium
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नोट :- क्रिस्टल संरचना एवं त्रिविम जालको के एकक सेलो को प्रदर्शित करने के लिए प्रायः उनके गोलक मॉडल (sphere model or space filing model ) प्रयुक्त किये जाते है जिनमे परमाणु और आयन गोलों (sphere )द्वारा निरूपित किये जाते है।
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समन्वय संख्या(co ordination number ):- क्रिस्टल में तत्व के परमाणु की क्रिस्टल समन्वय संख्या
परमाणु के निकटतम प्रतिवेशी परमाणुओं की संख्या उस परमाणु की क्रिस्टल समन्वय संख्या
(crystal co ordination कहलाती है।
1. सरल घन संरचना (simple cubic crystal structure ) :- इसमें प्रत्येक परमाणु के चारों ओर निकटतम 6 परमाणु होता है अतः इसकी समन्वय संख्या 6 होगी।
२. काय केन्द्रित घन (body centered cube -bcc ) :- इसमें धातु परमाणु के क्रिस्टल में प्रत्येक परमाणु की समन्वय संख्या 8 होती है।
3. फलक क्रिस्टल घन (face centered cube -fcc ) :- इसमें धातु परमाणु के क्रिस्टल में प्रत्येक परमाणु की समन्वय संख्या 12 होती है।
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घन क्रिस्टल निकाय के एकक सेल (एकक कोष्ठिका ) में परमाणुओं या आयनो की संख्या
का गणना
1 . सरल घनीय (primitive cubic ) :- इसमें 1 परमाणु प्रति एकक सेल में होता है।
2 . काय केंद्रित घन (bcc ) :- इस संरचना में २ परमाणु प्रति एकक सेल होते है।
3 . फलक केंद्रित घन (FCC ) :- इसमें एकक सेल में परमाणुओं की संख्या 4 होती है।
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