ट्रांसफॉर्मर एक स्थैतिक मशीन है।
कार्य सिद्धांत :- यह अन्योन्यं प्रेरण (mutual induction ) पर कार्य करती है।
रचना :- इसमें २ वाइंडिंग होते है।
१. प्राथमिक (primary ) २. द्वितीयक (secondary )
वाइंडिंग के आधार पर ट्रांसफार्मर को २ भाग में िभक्त किया गया है।
१. stepup (उच्चायी ) ट्रांसफार्मर २. stepdown ( अपचयी ) ट्रांसफार्मर
STEPUP ट्रांसफार्मर :- जिसमे सेकेंडरी वाइंडिंग में फेरो की संख्या अधिक होती है।
NS >NP
STEPDOWN ट्रांसफार्मर :- जिसमे प्राइमरी वाइंडिंग में फेरो की संख्या अधिक होती है
NP > NS
CORE (कोर ):- यह नम्र लोहे की चादर से बनी होती है। अथवा सिलिकॉन स्टील से बनी होती है.
नोट्स :- कम आवृति के लिए :- नर्म लोहा या सिलिकॉन स्टील
उच्च आवृति के लिए :- फेराइट कोर
कोर के कार्य :- १. वाइंडिंग को सपोर्ट प्रदान करना
२.प्राइमरी वाइंडिंग से चुम्बकीये फ्लक्स को सेकेंडरी वाइंडिंग तक पहुँचाना।
( फ्लक्स को पथ प्रदान करना )
कार्य :- जब प्राइमरी वाइंडिंग में AC सप्लाई दी जाती है तो इसमें चुम्बकीये क्षेत्र उत्पन्न होता है जो कोर के द्वारा सेकण्ड्री वाइंडिंग में प्रेरित होता है. फ्लक्स में परिवर्तन होने के कारण सेकेंडरी वाइंडिंग में EMF प्रेरित होने लगती है।
ट्रांसफार्मर RATIO ( परिरमण अनुपात ): -
ES/EP = NS/NP = IP/IS = K
नोट :- ट्रांसफार्मर दिष्ट धारा (DC) पर कार्य नहीं करती है।
क्योंकि DC सप्लाई देने पर वाइंडिंग का INDUCTANCE शुन्य हो जायेगा और धारा का मान बहुत ज्यादा हो जायेगा और वाइंडिंग जल जाएगी
